बढ़ते अत्याचार
न करो अत्याचार गाय हमारी माता है
चौरासी करोड़ देवी देवताओं का वास
इनमें समाया भूल जाता क्यों इंसान,
नहीं समझते इनकी एहमियत हो जाता
वो घर बर्बाद,
गौ सेवा है अपने कर्म को सुधारने का
जरिया भूल जाता अत्याचारी इंसान,
धर्म नहीं अधर्म है जहाँ गौ हत्या रूपी
अत्याचार किया जाता,
समझ न सकें जो बेजुबां का दर्द मिले न
ऐसे अत्याचारी इंसान को नर्क में भी
जगह, संभल जा ऐ अत्याचारी कर ले
गौ माता का सम्मान,
न कर इतना अत्याचार जगा दिल में
अपने दया रूपी भावनाओं का समावेश,
कर ले गौ की तू रक्षा न धर एक भक्षक का
रूप,
न भूलना ऐ अत्याचारी गौ हत्या गौ अत्याचार
का तू भुगतेगा बुरे परिणाम।
मिटा कर गौ हत्या रूपी अत्याचार चलो करें
गौ-शाला सेवा का नव निर्माण।