अपनें ग़मों की आज़माईश इस जग में कराना
कोशिश रहती है छुपा कर ग़म सारे जिंदगी को
बेहतर बनाना,कोई अपनी मर्जी से नहीं चाहता
किसी पर बोझ बनना,अक्सर जब हालात साथ
नहीं देते न चाहते हुए भी दूसरों पर निर्भर होना
पड़ता है,कोई नहीं चाहता घुटन भरी जिंदगी को
जीना अक्सर घुटन को भी अपनाना पड़ता है
कोई नहीं चाहता टूट कर बिखरती ख़्वाहिशों को
देखना, मगर हकीकत के अंजाम से रूबरू होना
पड़ता है,कोई नहीं चाहता झूठी तसल्ली लेकर
किसी का भी साथ लेना,
मगर हकीकत का आईना ही हमें जीना सिखाता है।