बिगड़ते हालात

बिगड़ते हालातों को देखकर हर आशियां में
छा गया सहमापन,
उड़ गये रंग खुशी के लम्हों में लग गया ग्रहण
खुशहाली में,
कहीं बिखरे आशियां तो कहीं पसरा सन्नाटा
कहाँ जाकर रूकेगा ये बिगड़े हालातों का तूफां
प्रकृति भी खेल रहीं जानें कैसा खेल,
करके अपनों को अपनों से जुदा मंद-मंद मुस्कुरा
रही, करके कैद जिन्दगी सभी की प्रकोप अपना
दिखा रही,
कहीं छीनती साँसों को तो कहीं घुटन महसूस
करा रही,कीमत लगा कर साँसों की तू खरीदने
पर मजबूर करा रही,
अपनों का मुख देखने को तरसे अपना इतना
है तरसा रही,
अंतिम दर्शन भी न करने दे जाने कैसा दस्तूर
बना रही।
अंतिम संस्कार की सम्पूर्ण विधि से वंचित कर
कोरोना का भय फैला रही।


Published by भोली_सी _ख़्वाहिशें_025_official

🌹इस दिल ने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा ये बात और है कि हमें साबित करना नहीं आया🌹

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started