चलते-चलते

चलते-चलते
चलते चलते इस जीवन पथ पर जाने कितने मुसाफ़िर मिले
जुड़े कितने अनमोल रिश्ते जीवन का सहारा बने

कुछ रिश्तों ने अपनापन दिया कुछ ने दिया परायापन
कुछ ने छुड़ा लिया हाथ तो किसी ने बोझ समझ छोड़
दिया,रूके कदम तो जाने कितने अपने हमसे दूर हुये
चलते-चलते जीवन-पथ जाने कितने मुसाफ़िर मिले।

कुछ ने दिखाया स्वार्थ अपना सबक हमें बेशुमार मिला
देकर जीवन अंधकारमय अंधविश्वास से हमें जगा दिया
चलते चलते जीवन पथ जाने कितने मुसाफ़िर मिले।

निभाया कुछ ने निस्वार्थ अपना दी हमें जीने की नई
चेतना जीवन किया प्रकाशमय हमारा देकर आत्मविश्वास
बढ़ा कर हमारा फिर से हौसला हमारा बुलंद किया
चलते-चलते जीवन-पथ जाने कितने मुसाफ़िर मिले।

Published by भोली_सी _ख़्वाहिशें_025_official

🌹इस दिल ने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा ये बात और है कि हमें साबित करना नहीं आया🌹

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