इश्क़ का पैग़ाम
हर दिल में यही पैग़ाम पहुँचाना है,नफ़रतों को
मिटा हर कठोर दिल मोम सा बनाना है
रख कर नफ़रत दिलों में इतनी क्या करोगे।
हर ग़म का नामों निशां दिलों से सबके मिटाना है
हर दिल में प्रेम भाव का पैग़ाम पहुँचाना है
क्यों करते हो बेकदरी इश्क़ की ये तो रब का
दिया नायाब तोहफा है
उदास चेहरे पर जो मुस्कान ले आयें वो प्रेम भाव है।
प्रेम बिना जिन्दगी अधूरी प्रेम से जिन्दगी हसीन।
हर दिल में इश्क़ का पैग़ाम पहुँचाना है हर रिश्तें की
मजहबी अटूट डोर को टूटने से बचाना है।
हर दिल में इश्क़ का पैग़ाम पहुँचाना है नफ़रतों को
दिलों से सबके मिटा ईद का त्यौहार मिलकर मनाना है।