ख़ुशियों की बरसात
अभिनंदन ख़ुशियों का मन रूपी उपवन में हो
जाने दो,झूम कर आये बिन सावन ख़ुशी जिन्दगी
में तो हर मौसम सावन का महीना सा हो जाने दो
यूँ न घिरे बैठो ग़मो की घटा तले,
सुकँ रूपी शीतल सी हवा का आगमन जीवन में
अपनें होने दो,
क्यों सँजो कर बैठै हो भूली-बिसरी ग़म भरी
यादों को हो जाने दो धूमिल धरा रूपी मन से
धुल जाने दो ख़ुशी रूपी रिमझिम सी बरसात में
करों स्वीकार उन ख़्वाहिशों को जो चाहती
हकीकत में बदलने को है न करों इंकार आई ख़ुशी
की बरसात को दरवाज़े यूँ मायूस हो कर न जाने दो,
बन जाने दो मन मयूर बन नृत्य कर जाने दो
रोको न इस बांवरे मन को भीग जाने दो ख़ुद
को इन ख़ुशी भरी बरसातों में,
हो जानें दो आबाद अपना आशियां ख़ुशी की
बरसात से जीवन अपना ख़ुशहाली भरा हो जाने दो।