कहते इसको अक्षय तृतीया आखातीज के नाम से भी जाना जाता,होते पूर्ण सब मंगल कार्य बैसाखी मास के शुक्ल पक्ष की
तृतीय तिथि शुभ है माना जाता,
हुआ प्रादुर्भाव भविष्य के नये युग सतयुग और त्रेता युग
यही पावन दिन को शुभ है माना जाता,
होते कमल चरण के दर्शन इस दिन बाँके बिहारी जी के
होता वो बड़ा ही भाग्यशाली जो भी इस दिन दर्शन है कर लेता।
हुआ था गँगा माँ का अवतरण हुई पवित्र पृथ्वी यही वो शुभ दिन माना है जाता।
हुआ चीर-हरण दौपदी का तो यही वो शुभ दिन जब कृष्णा ने
लाज की रक्षा के लिए अपना कृतवय था निभाया,
कृष्ण सुदामा का मिलन हुआ जब यही वो शुभ दिन माना है जाता।
कृषक सभी करते शगुन के लिए अच्छी फसल की मंगल कामना यही वो शुभ दिन माना है जाता ।