वो दिन याद आते हैं जब अपने वतन की सौंधी
मिट्टी के बने चूल्हे पर बनी
गुड़ और अदरक वाली चाय का मजा परिवार संग
मिट्टी के बनें कुल्हड़ में लिए जाता था,
जबसे मिट्टी के चूल्हे की जगह आधुनिक चूल्हे ने
ले ली और कुलहड़ की जगह पाश्चतय शैली के
चीनी मिट्टी के कपो ने ले ली,
वो पुरानी वाली चाय कहीं खो सी गई अब चाय
का वो स्वाद भी न रहा जो पहले हुआ करता था
परिवार में होते कम लगाव के कारण जहाँ चाय
का मजा संग लिया जाता था।
अब वही चाय का मजा अपने अपने कमरे अलग
बैठ कर लिया जाता है।