दिल हो चाहे कशमकश भरा कितना ही
अनसुलझे सवालों से घिरा हो कितना ही
आंखों में छाई हो मायूसी की धुँधलाहट कितनी ही
मन को आजाद पंछी बना करके नयनों को पंख बना
खुले आसमां में उड़ान भरा देना
जेब भले खाली हो जैसे कोई टूटती कोई डाली हो
ख़ुशियों की मुस्कुराहट मुट्ठी में भरकर भुजाओं को
अपनी इस कदर फैला लेना ऐसे ही ख़ुश रहने
की वजह तुम तलाश लेना।
जब पड़े पाँव में छाले तुम्हारे जीवन के कठिन दौर
की राह में तो।
जब लहू तुम्हारे पदचिह्न बनें और सफलता तुमसे दूर हो
तुम पत्थर सा दिल मुट्ठी में करके बाँधाओं को दूर करने का
हुनर दिल में जगा लेना।
जब लगे कि तुम हार गये थक चुके तो उम्मीदों की आरजू को
कसकर मुट्ठी में थाम कर ख़ुश रहने तमन्ना इस दिल में जगा लेना।