जाने हमारी कितनी ख्वाहिशें जिन्दगी की
किताब के पन्नों में कुछ
दर्द कुछ अनसुलझी सी उलझन का
बड़ा ही मार्मिक वर्णन है,
रखी है दुनिया से दूरी बना रिश्तों से
जुड़े और टूट जाने का भय लगता है
बंद किताब को कर हमने हमारी तकलीफ
को दबा रखा है।
जानते हैं सुनेगी दुनिया जरूर मगर कुछ
कर न पायेगी,
हमारे असहनीय पीड़ा का सैलाब इन आंखो में
छुपा रखा है,
हमारी जिन्दगी की कहानी का बड़ा ही
कमाल का अफसाना है।
कहते नहीं किसी से जो दिल में छुपा रखा है।
सुने न कोई किरदार हमारा कैसे करें हम बयां वहाँ
कहानी है हम कहानियों में ही रहने दो तो अच्छा है
दुनिया के सामने तमाशा बेशुमार बनता है।