हृदय के भावों को अपने मधुर वाणी रूपी
प्रेम से सजाइये,
मिटा कर अहंकार, ईर्ष्या रूपी भावों को
जीवन से अपने और हर इंसान के हृदय
में प्रेम का दीप जलाइये,
क्या रखा है इस जग में सिवा प्रेम के हृदय
में सभी के इस कदर बस जाइये,
प्रेम भाव से बोला गया एक मीठा मधुर बोल
आपकी हृदय की सुंदरता के साथ आपके मुख
की सुंदरता को भी निखारती है,
प्रेम का भाव तो ईश्वर की दी गई वो अमूल्य
पूँजी है,मिलती तो सभी को है, इस पूँजी को
अपने हृदय में हमेशा सजा कर रखिये
जय श्री राधे कृष्णा 🙏🏻