कैसा ग़म करना जीवन में तकलीफ तो
आती-जाती रहती हैं
क्यो रोना अपने कर्मो को जिन्दगी फिर
एक अवसर देती है
क्यो बैठना थक हार कर जैसा भी खेल है
इन संघर्षो का बस इम्तिहान देते जाना है
तकदीर का क्या है वो तो क्षण क्षण हाथ
की लकीरों सी बदलती रहती है
जय श्री राधे कृष्णा 🙏🏻