याद रखना हमेशा आपका कर्म आपका हुनर
आपकी पहचान है।
कर न लेना विलुप्त अपने आत्म विश्वास को
भाग्य के लेख के अधीन।
बदल जाता है भाग्य का लेख भी ग़र अपने
कर्म लक्ष्य और आत्मविश्वास पर यकीं हो।
यूँ ही न बैठ जाना थक हार कर भाग्य से
अपने ग़र अपने हाथों की बंद मुट्ठी की
लकीरों पर यकीं हो,
जय श्री राधे कृष्णा 🙏🏻