भाग्य भरोसे कुछ नहीं

याद रखना हमेशा आपका कर्म आपका हुनर
आपकी पहचान है।

कर न लेना विलुप्त अपने आत्म विश्वास को
भाग्य के लेख के अधीन।

बदल जाता है भाग्य का लेख भी ग़र अपने
कर्म लक्ष्य और आत्मविश्वास पर यकीं हो।

यूँ ही न बैठ जाना थक हार कर भाग्य से
अपने ग़र अपने हाथों की बंद मुट्ठी की
लकीरों पर यकीं हो,
जय श्री राधे कृष्णा 🙏🏻

Published by भोली_सी _ख़्वाहिशें_025_official

🌹इस दिल ने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा ये बात और है कि हमें साबित करना नहीं आया🌹

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