याद आती है बहुत आपकी पापा
उस पल में जब जिन्दगी के विकट
परिस्थिति के इम्तिहान को देते हुए
थक जाते है, कशमकश भरे सवालों
से मन हमारा हमको ही बहुत परेशान
करता है,सुनता नहीं कोई हमारी तकलीफ
जैसे आप हमारे बोलने से पहले समझ
जाया करते थे।
आती है उस पल में आपकी याद जब हमें
सहारे की जरूरत होती है और आपसे
सहारा कोई नहीं होता।
याद आती है उस पल में आपकी याद पापा
जब आपसी निस्वार्थता वफादारी इस फरेब
के माहौल में।
याद आती है उस पल में आपकी जब सारी
दुनिया हमें बोझ समझ नफ़रत से देखती है
थक गई इस दुनिया से लड़ते लड़ते,
अपनी बिटिया तरूणा को आपकी दुनिया
में वापस बुला लो पापा।