गुज़ारिश है तुझसे ऐ ज़िन्दगी पास तो आ
माना गुजर रही है जिन्दगी बदनसीबी के
साये तले।
पत्थर सा हुआ दिल अब,धुँध है छाई खुशियों
की लहरों पर।
ग़मो की जाने कैसी बाढ़ है आई,ख़्वाहिशें
हमारी साथ बहा ले गई।
मिल जाये किनारा ख़ुशियों को हमारी भी
एक दफा हम पर तू मेहरबां हो जा जरा सी,
हो न जाये मायूस ये तरूणा तुझसे ऐ जिन्दगी
बस ग़मों थोड़ा सा ठहराव ही चाहती है।