ओ आलस

जाने कैसा है तुझको हमसे बैर क्यो निभाये हमसे
शत्रुता इतनी,बिगड़ गई जीवन शैली दिनचर्या
हुआ तो तू हम पर इतना हावी कि सफलता की
सीढियां हम न चढ़ पाते, जागरूकता की कमी के
कारण आलस तू हमसे रूबरू हो हममें सुस्ती है लाता,
तेरे कारण हर निर्धारित कार्य विस्मृत है हो जाता ।
कभी देर से जागना सोना तेरी इन्ही देन के कारण
किसी न किसी रूप में तू हमें क्यो इतना सताता।
लगा कर रूकावट कार्य में हमारे उन्नति के मार्ग
अवरुद्ध कर तू हमें है भ्रमित करता।
चला जा,ओ आलस अब तो थोड़ा सा हम पर भी
रहम दिखला जा।

Published by भोली_सी _ख़्वाहिशें_025_official

🌹इस दिल ने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा ये बात और है कि हमें साबित करना नहीं आया🌹

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