ऐ मेरे प्यारे बिस्तर तुम्हारी शान तुम्हारा रूतबा भी
निराला है,कहीं पर तो तुम्हारी मखमली रेशमी चादर
से शोभा बढ़ती तो कहीं रस्सी की बानों से बुना जाता,
फिर भी सोया तो मेरे प्यारे बिस्तर तुम पर ही जाता
कोई लाखों खर्च करता तुम पर तो कोई सादी लकड़ी से
तुमको बनाता,फिर भी सपने तो तुम पर ही बुने जाते,
कहीं पर तुम फूलों सा महसूस कराते तो कहीं काँटो सा
बन जाते,फिर भी रहते तो घर की शोभा बढ़ा कर ही,
चार चाँद से कम न लगता वो,आशियां चाहे हो करोड़ों
का महल या हो किसी का सादा आशियां बिछाया तो
तुम को ही जाता,देख तुम्हारी निस्वार्थता को कर मन
गदगद हो जाता,किसी के ऊँचे तो किसी के छोटे ख्वाब
की दुनिया सँजोने में ऐ मेरे प्यारे बिस्तर सहारा तो तुम्हारा
ही लिया जाता।