कभी सफलता से युवाओं को दूर खींचती आवारगी,
कभी उदंडता की अति कर देती आवारगी,कभी बुरी
सगंत में विलीन कर देती आवारगी,कभी धन बर्बादी
का कारण बन परिवार से युवाओं को उनके अपनों से
जुदा करा देती आवारगी,कभी युवाओं के अपने
भारतीय संस्कृति के संस्कारों की कमी का कारण
बनती है आवारगी,बुजुर्गों के प्रति सम्मान और
छोटो के प्रति प्रेम भाव की कमी की वजह
युवाओं को अपनेपन के भाव में दूरियां लाने का
कारण बनती है आवारगी,कभी युवाओं के जीवन
को अपने हावीपने से विलुप्त कर उनको उनके
उज्जवल होते भविष्य पर ग्रहण लगने का कारण
बनती है आवारगी,