तुमको छू कर देखना है ऐ जिन्दगी

ऐ पल पल पिघलती लौ वाकई हमारा अस्तित्व
बाकी है या उजाले से अंधकार में विलुप्त हो
गया है,

जख्म जो मन पर लगे हैं बाँटे जो संग तुम्हारे,
क्या अक्स उनका बाकी है,
एक दफा ही सही उजाले के आईने में छू कर
ख़ुद को देखना है,

कतरे-कतरे में लौ सी कम हो रही ज़िन्दगी
एक दफा ही सही ज़िन्दगी का एक लम्हा ही
सही अपनी अधूरी ख्वाहिशों से रूबरू हो
जीकर देखना है,

Published by भोली_सी _ख़्वाहिशें_025_official

🌹इस दिल ने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा ये बात और है कि हमें साबित करना नहीं आया🌹

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