ऐ पल पल पिघलती लौ वाकई हमारा अस्तित्वबाकी है या उजाले से अंधकार में विलुप्त होगया है, जख्म जो मन पर लगे हैं बाँटे जो संग तुम्हारे,क्या अक्स उनका बाकी है,एक दफा ही सही उजाले के आईने में छू करख़ुद को देखना है, कतरे-कतरे में लौ सी कम हो रही ज़िन्दगीएक दफा ही सही ज़िन्दगीContinue reading “तुमको छू कर देखना है ऐ जिन्दगी”
Author Archives: भोली_सी _ख़्वाहिशें_025_official
विधाता का लेख
जानें कौन सी ख़्वाहिश हकीकत में बदलकरएक सुनहरी याद का पन्ना बन कर ज़िन्दगी कीकिताब के पन्नों में शामिल हो जाये, नहीं जानते नये दिन का नया सवेरा जाने कैसाआयाम ले,अच्छा हो बुरा हो बस हम तो उससेरूबरू होना है जानते, लिखा जो लेख विधाता ने उसको न हम दरकिनारकर पायें,मगर हो जाये लेख सुकूनContinue reading “विधाता का लेख”
भ्रम
जिन्दगी अधूरी लगती है जब कोई हमारेसाथ होते हुए भी हमारा नहीं होता,कितना भी बचाने की कोशिश करोरिश्ते को अंत में भ्रम टूट जाता हैकि वो कभी हमारा नहीं होता
जीवन का सार
जीवन व्यतीत करना बहुत आसान हैभावात्मक होना बहुत असान है हार से रूबरू होना भी बहुत आसान हैजीत की ख़ुशी मनाना भी बहुत आसान हैकभी कभी होता है सवाल अपने ही मन सेसब कुछ आसानी से होता है तो कठिनक्या हैं, मिलता है अक्सर अंतर्मन से यही जवाबकठिन है उस आसानी को सरल बनाना,जय श्रीContinue reading “जीवन का सार”
मंज़िलें मिल जाऐंगी
कहीं ये हमारा ख्वाब बनकर न रह जायेमुकद्दर हमारा बनते बनते न रह जायेतमन्ना रखते है हम भी हकीकत में बदलतीहर ख़्वाहिश की, कहीं नाकामयाबी हमारी हमारा विश्वास नतोड़ दे,तुम पर जो इतना अटूट विश्वास हैजाने और कितना इम्तिहान लोगे कान्हा, कब हमारा दामन खुशियों से भरकर,हमारे जीवन से उदासीपन को दूर करकेहकीकत रूपी मंजिलContinue reading “मंज़िलें मिल जाऐंगी”
ओ आवारगी
कभी सफलता से युवाओं को दूर खींचती आवारगी,कभी उदंडता की अति कर देती आवारगी,कभी बुरीसगंत में विलीन कर देती आवारगी,कभी धन बर्बादीका कारण बन परिवार से युवाओं को उनके अपनों सेजुदा करा देती आवारगी,कभी युवाओं के अपनेभारतीय संस्कृति के संस्कारों की कमी का कारणबनती है आवारगी,बुजुर्गों के प्रति सम्मान औरछोटो के प्रति प्रेम भाव कीContinue reading “ओ आवारगी”
प्यारे बिस्तर
ऐ मेरे प्यारे बिस्तर तुम्हारी शान तुम्हारा रूतबा भी निराला है,कहीं पर तो तुम्हारी मखमली रेशमी चादर से शोभा बढ़ती तो कहीं रस्सी की बानों से बुना जाता, फिर भी सोया तो मेरे प्यारे बिस्तर तुम पर ही जाता कोई लाखों खर्च करता तुम पर तो कोई सादी लकड़ी से तुमको बनाता,फिर भी सपने तोContinue reading “प्यारे बिस्तर”
बिटिया का घूँघट
बिटिया का घूँघट घूँघट को अपने कुल की लाज समझ उसमें बितादेती है बिटिया जीवन सारा ख्वाब अपने सारे धूमिल करके परिवार अपना खुशहाल बनाती है बिटिया,फ़र्ज अपना निभा कर वो हर रिश्ते के किरदार को बखूबी निभाती है बिटिया, ऊँची आवाज़ में न बोलना जाने खामोश हो हर कटु शब्द सुन लेती है बिटिया,सीखContinue reading “बिटिया का घूँघट”
प्रिय पेड़
पृथ्वी के सौन्दर्य हो, जीवन का आधार है तुमसेशीतल छाया भी तुम्हारी देन सहते स्वंय हरमौसम की पीड़ा, बिना मुकुट के तुम हो राजाकरते हम इंसानों की रक्षा, लगते हो तुम बेहदमनमोहक जंगल हो या गाँव या हो शहर तुम्हारेबिना न सब कुछ सूना तुमसे है इस धरा की शोभापक्षियों के तुम पर ही घरौंदेContinue reading “प्रिय पेड़”
ओ प्यारे आम
ओ प्यारे आमलो आ गया मौसम तुम्हारा भी बागों की हरडाल पर देखो कितना इठलाते हो मीठी-मीठीसौंधी खुशबू से महक उठा है सारा बागान,पेड़की हर डाली पर मानों हो तुम्हारा राज कच्चे पक्केप्यारे आम।सब के दिलों को है लुभाये क्या बच्चा क्या बुजुर्गक्या युवा हर दिल का राजा है आम,जाने कितनी किस्में है तुम्हारी अल्फान्सो,लंगड़ातोतापुरी,केसर,दशहरीContinue reading “ओ प्यारे आम”