ऐ पल पल पिघलती लौ वाकई हमारा अस्तित्व
बाकी है या उजाले से अंधकार में विलुप्त हो
गया है,
जख्म जो मन पर लगे हैं बाँटे जो संग तुम्हारे,
क्या अक्स उनका बाकी है,
एक दफा ही सही उजाले के आईने में छू कर
ख़ुद को देखना है,
कतरे-कतरे में लौ सी कम हो रही ज़िन्दगी
एक दफा ही सही ज़िन्दगी का एक लम्हा ही
सही अपनी अधूरी ख्वाहिशों से रूबरू हो
जीकर देखना है,
विधाता का लेख
जानें कौन सी ख़्वाहिश हकीकत में बदलकर
एक सुनहरी याद का पन्ना बन कर ज़िन्दगी की
किताब के पन्नों में शामिल हो जाये,
नहीं जानते नये दिन का नया सवेरा जाने कैसा
आयाम ले,अच्छा हो बुरा हो बस हम तो उससे
रूबरू होना है जानते,
लिखा जो लेख विधाता ने उसको न हम दरकिनार
कर पायें,मगर हो जाये लेख सुकून भरा पन्नों में
शामिल यही तमन्ना लिए हम दिन की शुरुआत
हैं करतें,
भ्रम
जिन्दगी अधूरी लगती है जब कोई हमारे
साथ होते हुए भी हमारा नहीं होता,
कितना भी बचाने की कोशिश करो
रिश्ते को अंत में भ्रम टूट जाता है
कि वो कभी हमारा नहीं होता
जीवन का सार
जीवन व्यतीत करना बहुत आसान है
भावात्मक होना बहुत असान है
हार से रूबरू होना भी बहुत आसान है
जीत की ख़ुशी मनाना भी बहुत आसान है
कभी कभी होता है सवाल अपने ही मन से
सब कुछ आसानी से होता है तो कठिन
क्या हैं,
मिलता है अक्सर अंतर्मन से यही जवाब
कठिन है उस आसानी को सरल बनाना,
जय श्री राधे कृष्णा 🙏🏻
मंज़िलें मिल जाऐंगी
कहीं ये हमारा ख्वाब बनकर न रह जाये
मुकद्दर हमारा बनते बनते न रह जाये
तमन्ना रखते है हम भी हकीकत में बदलती
हर ख़्वाहिश की,
कहीं नाकामयाबी हमारी हमारा विश्वास न
तोड़ दे,तुम पर जो इतना अटूट विश्वास है
जाने और कितना इम्तिहान लोगे कान्हा,
कब हमारा दामन खुशियों से भरकर,
हमारे जीवन से उदासीपन को दूर करके
हकीकत रूपी मंजिल तक पहुँचाओगे
कान्हा,
जय श्री राधे कृष्णा 🙏🏻
ओ आवारगी
कभी सफलता से युवाओं को दूर खींचती आवारगी,
कभी उदंडता की अति कर देती आवारगी,कभी बुरी
सगंत में विलीन कर देती आवारगी,कभी धन बर्बादी
का कारण बन परिवार से युवाओं को उनके अपनों से
जुदा करा देती आवारगी,कभी युवाओं के अपने
भारतीय संस्कृति के संस्कारों की कमी का कारण
बनती है आवारगी,बुजुर्गों के प्रति सम्मान और
छोटो के प्रति प्रेम भाव की कमी की वजह
युवाओं को अपनेपन के भाव में दूरियां लाने का
कारण बनती है आवारगी,कभी युवाओं के जीवन
को अपने हावीपने से विलुप्त कर उनको उनके
उज्जवल होते भविष्य पर ग्रहण लगने का कारण
बनती है आवारगी,
प्यारे बिस्तर
ऐ मेरे प्यारे बिस्तर तुम्हारी शान तुम्हारा रूतबा भी
निराला है,कहीं पर तो तुम्हारी मखमली रेशमी चादर
से शोभा बढ़ती तो कहीं रस्सी की बानों से बुना जाता,
फिर भी सोया तो मेरे प्यारे बिस्तर तुम पर ही जाता
कोई लाखों खर्च करता तुम पर तो कोई सादी लकड़ी से
तुमको बनाता,फिर भी सपने तो तुम पर ही बुने जाते,
कहीं पर तुम फूलों सा महसूस कराते तो कहीं काँटो सा
बन जाते,फिर भी रहते तो घर की शोभा बढ़ा कर ही,
चार चाँद से कम न लगता वो,आशियां चाहे हो करोड़ों
का महल या हो किसी का सादा आशियां बिछाया तो
तुम को ही जाता,देख तुम्हारी निस्वार्थता को कर मन
गदगद हो जाता,किसी के ऊँचे तो किसी के छोटे ख्वाब
की दुनिया सँजोने में ऐ मेरे प्यारे बिस्तर सहारा तो तुम्हारा
ही लिया जाता।
बिटिया का घूँघट
बिटिया का घूँघट
घूँघट को अपने कुल की लाज समझ उसमें बिता
देती है बिटिया जीवन सारा
ख्वाब अपने सारे धूमिल करके परिवार अपना
खुशहाल बनाती है बिटिया,
फ़र्ज अपना निभा कर वो हर रिश्ते के किरदार को
बखूबी निभाती है बिटिया,
ऊँची आवाज़ में न बोलना जाने खामोश हो हर
कटु शब्द सुन लेती है बिटिया,
सीख लेती छोटी उम्र में चूल्हा चोका खाना बनाना
खो देती है बचपन सारा वो बीटिया,
जन्म से रहती माँ बाप भाई के लगाई बंदिश
के दायरे में ,दूजे घर में जाकर पति बच्चों की लगाई
बंदिश के दायरों में आजादी से जीना भूल जाती
है बिटिया।
प्रिय पेड़
पृथ्वी के सौन्दर्य हो, जीवन का आधार है तुमसे
शीतल छाया भी तुम्हारी देन सहते स्वंय हर
मौसम की पीड़ा, बिना मुकुट के तुम हो राजा
करते हम इंसानों की रक्षा, लगते हो तुम बेहद
मनमोहक जंगल हो या गाँव या हो शहर तुम्हारे
बिना न सब कुछ सूना तुमसे है इस धरा की शोभा
पक्षियों के तुम पर ही घरौंदे बचा लेते उनका जीवन
जहाँ तुम होते शीतलता की लहर है चल पड़ती,
बरसता सावन सूखी हरियाली फिर लहलहाती
ताल तलैया है भर जाते इस धरा के अवतारी तुम हो
खुशहाली का द्वार खुलते तुमसे हैं
स्वच्छ स्वास्थ तुमसे है मिलता श्रम है सारा तुम हर लेते
फूल फल सब्जी तुम हमको हो देते बदले में हमसे कुछ न
लेते। करते हो नित्य उपकार हम सभी पर सेवा भाव के
प्रतिक हो तुम प्रिय पेड़।
ओ प्यारे आम
ओ प्यारे आम
लो आ गया मौसम तुम्हारा भी बागों की हर
डाल पर देखो कितना इठलाते हो मीठी-मीठी
सौंधी खुशबू से महक उठा है सारा बागान,पेड़
की हर डाली पर मानों हो तुम्हारा राज कच्चे पक्के
प्यारे आम।
सब के दिलों को है लुभाये क्या बच्चा क्या बुजुर्ग
क्या युवा हर दिल का राजा है आम,
जाने कितनी किस्में है तुम्हारी अल्फान्सो,लंगड़ा
तोतापुरी,केसर,दशहरी हर राज्य हर प्रांत में तुम्हारी
प्रसिद्धी है बेशुमार,तुमको पाकर हर कोई ख़ुश हो
जाता हो तुम सबके प्रिय प्राण।