दूर न जाना

निकल न जाना दूर इतना भी अपने अति-आत्मविश्वास
के जहाज में सवार हो,

कि जब तुम आत्म-विश्वास की जमीं पर उतरो तो
ख़ुद से नजरें भी न मिला पाओ।

भरना उड़ान उतनी ही जितनी जरूरी हो कभी-कभी
ज्यादा ऊँचाई की उड़ान भी हानि पहुँचाती है।

प्यार से सजाइये

हृदय के भावों को अपने मधुर वाणी रूपी
प्रेम से सजाइये,
मिटा कर अहंकार, ईर्ष्या रूपी भावों को
जीवन से अपने और हर इंसान के हृदय
में प्रेम का दीप जलाइये,
क्या रखा है इस जग में सिवा प्रेम के हृदय
में सभी के इस कदर बस जाइये,
प्रेम भाव से बोला गया एक मीठा मधुर बोल
आपकी हृदय की सुंदरता के साथ आपके मुख
की सुंदरता को भी निखारती है,
प्रेम का भाव तो ईश्वर की दी गई वो अमूल्य
पूँजी है,मिलती तो सभी को है, इस पूँजी को
अपने हृदय में हमेशा सजा कर रखिये
जय श्री राधे कृष्णा 🙏🏻

भाई की अनमोलता

भाई की अनमोलता
वो रिश्ता बड़ा अनमोल है
वो करके कठिन परिश्रम करके
वो समझे अपनी बहन की हर खामोशी को
कभी एक पिता सा साया बन कर जिन्दगी
के तजुर्बे से रूबरू कराये।
कभी एक भाई होने का अपनी जिम्मेदारी को
बखूबी निभाये।
कभी न हमें सताये वो भाई है जो उदास चेहरे पर
भी ख़ुशी की लहर ले आये।
ये छाँव हमेशा हम पर बनी रहे भाई बहन का प्यार
हमेशा यूँ ही बरकरार रहे।

मनोरम ख्वाब

मनोरम ख़्वाब
देखा बड़ा ही मनोरम ख़्वाब अर्ध रात्रि कि
चल पड़े हैं रूके कदम,

मानों आसमां को छूने को उठ पड़े है कदम
असहनीय पीड़ा से मिला छुटकारा ये सोच
मन उत्साहित हो उठा,

निकल पड़े अंजान राहों पर दुनिया से हो बेखबर
सैर करने,
कभी दौड़ते कभी उछल कर पेड़ की टहनियों
को पकड़ने की कोशिश करते।

कभी खिलखिलाते कभी फिर कदम चल पड़ते
मानों सारी जिन्दगी उस एक पल में जी लेना चाहते
अचानक हुआ खटका तेज हवा में खुला दरवाज़ा

बड़ी जोर की हुई आवाज़ ने ख्वाब से जगा दिया
हुआ सवेरा टूटा भ्रम देखा वहीं रूके हुऐ थे कदम।
बहला कर अपने ख़्वाब को हकीकत से रूबरू करा
दिया।

तलाश ख़ुद की

दुख हो सुख हो इनके अतिरिक्त भी जीवन है
हमारा ईश्वर हमारा सारथी और हमारा जीवन-दाता है
बाकी है तो ख़ुद में ख़ुद की तलाश जो कि ताउम्र से
जारी है और जारी रहेगी,दूसरों से क्या गिले शिकवे करना शिकायत हो जो भी ख़ुद से ही है जो भी खलिश सी दिल में
अभी बाकी है,दुनिया से झगड़ा कर कौन सी जंग जीत हासिल
करने की समझदारी है
वक्त मिला है तो ख़ुद के लिए थोड़ा वक्त निकाल कर ख़ुशी से
रहना सीखना जारी है
हमारे अतिरिक्त कोई गैर नहीं यहाँ ख़ुद को ख़ुद से मिलाना अभी बाक़ी है,
ख़ुद की तलाश का क्या है वो तो हर क्षण अपनी जारी है।

प्यारी सखी जिन्दगी

प्यारी सखी जिन्दगी
कष्टों को सहन करते करते जिन्दगी
हमारी पीड़ा सखी बन गई,
हमारे संघर्ष भरी दास्ताँ सुनी तो हमारे संग
फूट फूट कर रो पड़ी।
व्यथा में हमारी रोई इतना कि जग में परिहास
का कारण बन गई,
जागी फिर से जीने की तमन्ना तो दुनिया की
नफ़रत भरी निगाहों में खटक उपहास
का कारण बन गई,
दर्द के मन रूपी पंछी तुझे मैं सहलाऊंगी
सुनकर जख्मों के नयन रूदन की अश्रु से
भर गई,
कश्ती उतरी जिन्दगी को संग लिए हमारी
कष्ट रूपी समंदर में,
टूटी फूटी कश्ती हमारी जानें कैसे पार लगे
ज़िन्दगी ने थाम कर हाथ हमारा बदनसीबी
पर हमारी झर झर अश्रु बहा पड़ी,
देखा सामने हमने अक्स अपना तो इस छोटी
उम्र में ही शख्सियत हमारी धुँधला सी गई।
कतरे कतरे में कट रहा इस कदर सफ़र कि
जिन्दगी भी हमसे तंग हो हमसे ही
नजरें चुराने लगी।

जीवन राग अनोखा

जीवन राग अनोखा
ये जीवन भी बड़ा कमाल का राग है
दुख भरा राग रूपी दुखड़ा विलापोगे
दुनिया तुम्हे जीने न देगी।
खुश रहोगे तो ये दुनिया सर आँखों पर
तुम्हें बिठायेगी,
सीख लो ख़ुद का सहारा बन कर जीना
वर्ना दुनिया तुम्हें मूर्ख समझ तुम्हारा तमाशा
बना डालेगी।
दुख कितना भी हो न करना दुनिया के सामने
जाहिर
वर्ना ये दुनिया हर रिश्ते में तुम्हें नफ़रत भर
तुम्हें अपमानित कर तिरस्कृत ही करेगी।
ये करता है तुम पर निर्भर कि तुम कौन सा
जीवन राग आलापना चाहोगे।
दस्तूर है दुनिया का या तो गिराये जाओगे
या उठाये जाओगे।

सैलाब ए गम

जाने हमारी कितनी ख्वाहिशें जिन्दगी की
किताब के पन्नों में कुछ
दर्द कुछ अनसुलझी सी उलझन का
बड़ा ही मार्मिक वर्णन है,
रखी है दुनिया से दूरी बना रिश्तों से
जुड़े और टूट जाने का भय लगता है
बंद किताब को कर हमने हमारी तकलीफ
को दबा रखा है।
जानते हैं सुनेगी दुनिया जरूर मगर कुछ
कर न पायेगी,
हमारे असहनीय पीड़ा का सैलाब इन आंखो में
छुपा रखा है,
हमारी जिन्दगी की कहानी का बड़ा ही
कमाल का अफसाना है।
कहते नहीं किसी से जो दिल में छुपा रखा है।
सुने न कोई किरदार हमारा कैसे करें हम बयां वहाँ
कहानी है हम कहानियों में ही रहने दो तो अच्छा है
दुनिया के सामने तमाशा बेशुमार बनता है।

एक संघर्ष (रोजगार)

एक संघर्ष
आजाद पंछी सा हुआ करता था वो इंसान कभी
दुनियादारी से बेखबर हो अपनी ही दुनिया में खोया
रहता था कभी,
हुआ करता था हकीकत से अंजान कभी रिश्तो की
समझ न हुआ करती थी कभी,
जिन्दगी के संघर्ष भरे दौर से सामना न किया था कभी
देखी न थी कभी उसने दुनिया की कड़क धूप,
आया जिन्दगी में एक मोड़ ऐसा बदलते हालातों ने
उसके जीवन का समीकरण का गणित ही बदल डाला
जो जिया करता था कभी राजकुमारों सी जिन्दगी
दब गया परिवार की जिम्मेदारी के बोझ तले
दो वक्त की रोटी कमाने की खातिर निकल पड़ा परदेश
छोड़ परिवार को जाने की मजबूरी दे न उसका दिल गवाही
रहता न था कभी परिवार की नजरों से ओझल
लेना पड़ा उसे इतना बड़ा कदम,चल पड़े कदम उसके अंजान
शहर की गलियों की ओर।
बड़ा इंसान बनने का सपना लिए वो अपने माँ पापा का जिगर
का टुकड़ा हुआ करता था कभी मजबूर उनकी नजरों से ओझल होने को मजबूर,
हो काश कोई करिश्मा ऐसा मेहनत उसकी रंग ले आये
जो ख्वाब उसके माँ पापा ने देखें उनको वो पूरा कर पाये।
यही काश की उम्मीद लिए निकल पड़ा ख्वाब हकीकत में बदलने को।

ख़ुश रहना

दिल हो चाहे कशमकश भरा कितना ही
अनसुलझे सवालों से घिरा हो कितना ही
आंखों में छाई हो मायूसी की धुँधलाहट कितनी ही
मन को आजाद पंछी बना करके नयनों को पंख बना
खुले आसमां में उड़ान भरा देना
जेब भले खाली हो जैसे कोई टूटती कोई डाली हो
ख़ुशियों की मुस्कुराहट मुट्ठी में भरकर भुजाओं को
अपनी इस कदर फैला लेना ऐसे ही ख़ुश रहने
की वजह तुम तलाश लेना।
जब पड़े पाँव में छाले तुम्हारे जीवन के कठिन दौर
की राह में तो।
जब लहू तुम्हारे पदचिह्न बनें और सफलता तुमसे दूर हो
तुम पत्थर सा दिल मुट्ठी में करके बाँधाओं को दूर करने का
हुनर दिल में जगा लेना।
जब लगे कि तुम हार गये थक चुके तो उम्मीदों की आरजू को
कसकर मुट्ठी में थाम कर ख़ुश रहने तमन्ना इस दिल में जगा लेना।

Design a site like this with WordPress.com
Get started