कोई नहीं चाहता

अपनें ग़मों की आज़माईश इस जग में कराना
कोशिश रहती है छुपा कर ग़म सारे जिंदगी को
बेहतर बनाना,कोई अपनी मर्जी से नहीं चाहता
किसी पर बोझ बनना,अक्सर जब हालात साथ
नहीं देते न चाहते हुए भी दूसरों पर निर्भर होना
पड़ता है,कोई नहीं चाहता घुटन भरी जिंदगी को
जीना अक्सर घुटन को भी अपनाना पड़ता है
कोई नहीं चाहता टूट कर बिखरती ख़्वाहिशों को
देखना, मगर हकीकत के अंजाम से रूबरू होना
पड़ता है,कोई नहीं चाहता झूठी तसल्ली लेकर
किसी का भी साथ लेना,
मगर हकीकत का आईना ही हमें जीना सिखाता है।

ख़ुशियों का दरवाज़ा

ख़ुशियों का दरवाज़ा
खुल जाता है ख़ुशियों का दरवाज़ा जिस घर
मेरे कान्हा का वास है होता,
मिट जाते है सारे दुख दर्द जिस घर मेरे कान्हा के
सत्संग का गुणगान है होता,
सौंदर्य और शुद्ध वातावरण से परिपूर्ण हो
जाता वो आशियां जहाँ मेरे कान्हा का श्रृंगार
है होता,
होता अन्नपूर्णा का वास जिस घर नित प्रथम भोग
कान्हा का है लगता,
रोशनी से भर जाता वो आशियां जहाँ मेरे कान्हा
प्रातः संध्या का दीप है जलता,
बन जाते सब बिगड़े काम जो ‘वृंदावन’धाम का
दर्शन है कर लेता।
जय श्री राधे कृष्णा 🙏🏻

धरती की हवा

धरती की हवा का रूख बदल गया
हम इंसानों की गलतियों की सजा का
परिचय कोरोना के कहर रूपी तूफां से
रूबरू करा दिया,
जाने कितनी दफा प्रकृति की सुंदरता
दांव पर लगी,
उसका खामियाजा हर इंसान भुगत रहा
बिगड़ गई धरती की हवा पानी पर्यावरण
का हुआ सत्यानाश।
वक्त है बाकी संभल जाओ प्रकृति के रक्षक
बचा लो अपनी धरती का अभिमान।
कर लो प्रण सभी मिलकर, करें हरियाली
का निर्माण,बनाये स्वच्छ पर्यावरण फैला कर
ये जन-जन में संदेश चलो चलाये एक अभियान।

लेखन का महत्व

लेखन का महत्व
जीवन की हकीकत से रूबरू कराता
है लेखन ,
जीवन की सभी प्रकार की गतिविधियों
का समावेश है लेखन,
प्रेरणादायक प्रभावशालीनता से परिपूर्ण
है लेखन,
मानसिक विचारधारा के विकास का आधार
है लेखन,
सत्य-असत्य की पहचान बखूबी कराता है
लेखन,
तन्हा भरे जीवन का सच्चाई सा साथ
निभाता है लेखन,
न करना कभी लेखन का दुरपयोग और
अपमान कभी,
सौ प्रतिशत लेखक की लेखनी की शुद्धता
की पहचान है लेखन,

युवाओं का जीवन

युवाओं का जीवन
हो गया आज का हर युवा इतना लाचार
इतना मजबूर कुछ समझ न आये।
पढ़े-लिखे बड़ी डिग्री हासिल किये सड़क
की ख़ाक छानते दर-दर भटकते नजर आयें,
रह गया भविष्य अधर में बेरोजगारी का साया
ऐसा छाये,मंज़र हुआ अब ऐसा वीरान हर कोई
रोजगार के लिए तरसा है जाये,
अमीर हो या गरीब हर युवा चिंता के भंवर में
समाया है जाये,
हाय रे कोरोना क्यों हुआ आगमन तेरा
हर युवा के दिल में तेरा खौफ इतना कि घर
से बाहर निकलने से घबराये,
कैसे करें भविष्य सुरक्षित हर युवा के मुख पर
शिकन की लकीरें साफ देखी है जाये,
चला जा तू कोरोना हर युवा यही दोहराये।

बढ़ते अत्याचार

बढ़ते अत्याचार
न करो अत्याचार गाय हमारी माता है
चौरासी करोड़ देवी देवताओं का वास
इनमें समाया भूल जाता क्यों इंसान,
नहीं समझते इनकी एहमियत हो जाता
वो घर बर्बाद,
गौ सेवा है अपने कर्म को सुधारने का
जरिया भूल जाता अत्याचारी इंसान,
धर्म नहीं अधर्म है जहाँ गौ हत्या रूपी
अत्याचार किया जाता,
समझ न सकें जो बेजुबां का दर्द मिले न
ऐसे अत्याचारी इंसान को नर्क में भी
जगह, संभल जा ऐ अत्याचारी कर ले
गौ माता का सम्मान,
न कर इतना अत्याचार जगा दिल में
अपने दया रूपी भावनाओं का समावेश,
कर ले गौ की तू रक्षा न धर एक भक्षक का
रूप,
न भूलना ऐ अत्याचारी गौ हत्या गौ अत्याचार
का तू भुगतेगा बुरे परिणाम।
मिटा कर गौ हत्या रूपी अत्याचार चलो करें
गौ-शाला सेवा का नव निर्माण।

बचपन

बचपन तो देखों इन मासूमों का
अक्सर बचपन की जिम्मेदारी का बोझ
ऐसे मासूम के कंधो पर आ जाता है,जिनको
जिंदगी के इम्तिहान से रूबरू होना तक नहीं
आता।
मगर परिस्थिति और परिवार की जिम्मेदारी
उनको हर हाल में जीना सिखा देती है।
मर जाती है सारी ख़्वाहिश,
शिक्षा पाने की तमन्ना इन मासूमों के दिल
में ही खत्म हो जाती है।
खो जाता है बचपन इनका जिम्मेदारी के
बोझ तले।
कहते नहीं कुछ भी किसी समझदार हो जाते
इतने गम अपना सारा मुस्कुराहट के पीछे छुपा
जाते।
जानते हुए सब कुछ फिर भी इनकी सूनी आंखो में
एक दिन बड़ा इंसान बन सफल हो इस दुनिया पर
छा जाने का अरमां जगते हैं।

बेहतर की उम्मीद

बेहतर की उम्मीद में अक्सर ऐसा
मोड़ आ जाता है,
हमारी नकारात्मक विचारधारा कुछ
इस कदर हावी हो जाती है हमारी
सकारात्मक विचारधाराओं का मनोबल
कमजोर कर हमारे जीवन के गणित का
परिणाम ही बदल देती है।

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