कोई नहीं चाहता

अपनें ग़मों की आज़माईश इस जग में करानाकोशिश रहती है छुपा कर ग़म सारे जिंदगी कोबेहतर बनाना,कोई अपनी मर्जी से नहीं चाहताकिसी पर बोझ बनना,अक्सर जब हालात साथनहीं देते न चाहते हुए भी दूसरों पर निर्भर होनापड़ता है,कोई नहीं चाहता घुटन भरी जिंदगी कोजीना अक्सर घुटन को भी अपनाना पड़ता हैकोई नहीं चाहता टूट करContinue reading “कोई नहीं चाहता”

ख़ुशियों का दरवाज़ा

ख़ुशियों का दरवाज़ा खुल जाता है ख़ुशियों का दरवाज़ा जिस घरमेरे कान्हा का वास है होता,मिट जाते है सारे दुख दर्द जिस घर मेरे कान्हा के सत्संग का गुणगान है होता, सौंदर्य और शुद्ध वातावरण से परिपूर्ण हो जाता वो आशियां जहाँ मेरे कान्हा का श्रृंगारहै होता, होता अन्नपूर्णा का वास जिस घर नित प्रथमContinue reading “ख़ुशियों का दरवाज़ा”

धरती की हवा

धरती की हवा का रूख बदल गयाहम इंसानों की गलतियों की सजा कापरिचय कोरोना के कहर रूपी तूफां सेरूबरू करा दिया,जाने कितनी दफा प्रकृति की सुंदरतादांव पर लगी,उसका खामियाजा हर इंसान भुगत रहाबिगड़ गई धरती की हवा पानी पर्यावरणका हुआ सत्यानाश।वक्त है बाकी संभल जाओ प्रकृति के रक्षकबचा लो अपनी धरती का अभिमान।कर लो प्रणContinue reading “धरती की हवा”

लेखन का महत्व

लेखन का महत्वजीवन की हकीकत से रूबरू कराताहै लेखन ,जीवन की सभी प्रकार की गतिविधियोंका समावेश है लेखन,प्रेरणादायक प्रभावशालीनता से परिपूर्णहै लेखन,मानसिक विचारधारा के विकास का आधारहै लेखन,सत्य-असत्य की पहचान बखूबी कराता हैलेखन,तन्हा भरे जीवन का सच्चाई सा साथनिभाता है लेखन,न करना कभी लेखन का दुरपयोग औरअपमान कभी,सौ प्रतिशत लेखक की लेखनी की शुद्धताकी पहचानContinue reading “लेखन का महत्व”

युवाओं का जीवन

युवाओं का जीवनहो गया आज का हर युवा इतना लाचारइतना मजबूर कुछ समझ न आये।पढ़े-लिखे बड़ी डिग्री हासिल किये सड़ककी ख़ाक छानते दर-दर भटकते नजर आयें,रह गया भविष्य अधर में बेरोजगारी का सायाऐसा छाये,मंज़र हुआ अब ऐसा वीरान हर कोईरोजगार के लिए तरसा है जाये,अमीर हो या गरीब हर युवा चिंता के भंवर मेंसमाया हैContinue reading “युवाओं का जीवन”

बढ़ते अत्याचार

बढ़ते अत्याचारन करो अत्याचार गाय हमारी माता हैचौरासी करोड़ देवी देवताओं का वासइनमें समाया भूल जाता क्यों इंसान,नहीं समझते इनकी एहमियत हो जातावो घर बर्बाद,गौ सेवा है अपने कर्म को सुधारने काजरिया भूल जाता अत्याचारी इंसान,धर्म नहीं अधर्म है जहाँ गौ हत्या रूपीअत्याचार किया जाता,समझ न सकें जो बेजुबां का दर्द मिले नऐसे अत्याचारी इंसानContinue reading “बढ़ते अत्याचार”

बचपन

बचपन तो देखों इन मासूमों काअक्सर बचपन की जिम्मेदारी का बोझऐसे मासूम के कंधो पर आ जाता है,जिनकोजिंदगी के इम्तिहान से रूबरू होना तक नहींआता।मगर परिस्थिति और परिवार की जिम्मेदारीउनको हर हाल में जीना सिखा देती है।मर जाती है सारी ख़्वाहिश,शिक्षा पाने की तमन्ना इन मासूमों के दिलमें ही खत्म हो जाती है।खो जाता हैContinue reading “बचपन”

बेहतर की उम्मीद

बेहतर की उम्मीद में अक्सर ऐसामोड़ आ जाता है,हमारी नकारात्मक विचारधारा कुछइस कदर हावी हो जाती है हमारीसकारात्मक विचारधाराओं का मनोबलकमजोर कर हमारे जीवन के गणित कापरिणाम ही बदल देती है।

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